गुफा का सन्नाटा और खून की महक
शहर की चकाचौंध से दूर, अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसी एक वीरान घाटी में सन्नाटा पसरा हुआ था।
रात के दो बज रहे थे। हवा में एक अजीब सी ठंडक थी, जो हड्डियों तक को कँपा देने वाली थी।
आर्यन अपनी टॉर्च की रोशनी को गुफा की दीवारों पर फिरा रहा था।
वह एक उभरता हुआ आर्कियोलॉजिस्ट था, जिसे पुरानी दीवारों में दफन कहानियों को कुरेदने का जुनून था।
लेकिन आज, वह यहाँ किसी सरकारी प्रोजेक्ट के लिए नहीं, बल्कि उन सपनों के पीछे आया था जो उसे पिछले छह महीनों से सोने नहीं दे रहे थे।
"यहीं कहीं होना चाहिए..." आर्यन बुदबुदाया। उसकी सांसें तेज थीं।
गुफा के अंत में एक संकरा रास्ता था, जहाँ से सूखी मिट्टी की नहीं।
बल्कि लोहे और जलते हुए मांस की गंध आ रही थी—कम से कम आर्यन को ऐसा ही महसूस हो रहा था।
उसने अपनी जेब से एक पुराना नक्शा निकाला, जो उसे एक कबाड़ की दुकान में मिली एक पुरानी किताब के फटे पन्ने से मिला था।
जैसे ही वह आगे बढ़ा, उसका पैर एक पत्थर से टकराया। टॉर्च की रोशनी नीचे गिरी और एक चमकती हुई चीज़ पर जा टिकी।
वह एक सिक्का था आर्यन ने कांपते हाथों से उसे उठाया। वह पीतल का था, लेकिन उस पर समय की धूल का कोई असर नहीं था।
सिक्के के एक तरफ एक 'जलता हुआ कमल' बना था और दूसरी तरफ एक कटी हुई तलवार।
जैसे ही आर्यन की उंगलियों ने उस ठंडी धातु को छुआ, उसके दिमाग में एक धमाका सा हुआ।
यादों का सैलाब
टॉर्च उसके हाथ से छूटकर गिर गई। गुफा गायब हो गई। सन्नाटा अचानक चीखों में बदल गया।
आर्यन को महसूस हुआ कि वह खड़ा नहीं है, बल्कि घोड़े पर सवार है। उसके चारों ओर हज़ारों सैनिक थे।
आसमान धुएं से काला पड़ चुका था। उसके शरीर पर भारी कवच था, जो खून से लथपथ था।
"महाराज! पीछे हटिए! दुर्ग का द्वार टूट चुका है!" एक सैनिक चिल्लाया।
आर्यन ने अपने हाथ देखे। वे उसके हाथ नहीं थे—वे कलाई तक खून में डूबे हुए एक योद्धा के हाथ थे।
उसने अपनी म्यान से एक विशाल तलवार निकाली। उसके सीने में एक भयानक दर्द था, जैसे कोई उसे अंदर से जला रहा हो।
"रत्ना..." उसके होंठों से एक नाम निकला।
तभी, सामने से एक घुड़सवार तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ा।
उस घुड़सवार का चेहरा धुंधला था, लेकिन उसकी आँखों में जो नफरत थी, वह आर्यन को झकझोर गई।
उस शख्स ने अपनी तलवार हवा में लहराई और सीधे आर्यन की गर्दन की ओर वार किया।
वर्तमान की दहलीज
"नहीं!"आर्यन झटके से होश में आया। वह गुफा की ठंडी जमीन पर पड़ा था।
उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था। टॉर्च की रोशनी मंद पड़ रही थी।
उसने अपनी मुट्ठी खोली। वह सिक्का अभी भी उसके हाथ में था, लेकिन अब वह ठंडा नहीं, बल्कि गर्म था।
इतना गर्म कि आर्यन की हथेली पर उस जलते हुए कमल का निशान छप गया था।
उसने अपनी शर्ट के बटन खोले और आईने की ज़रूरत के बिना ही अपनी पीठ के दाहिने हिस्से को छुआ।
वहाँ बचपन से एक गहरा लाल निशान था—बिल्कुल वैसा ही जैसे किसी ने तलवार का गहरा घाव दिया हो। आज उस निशान में जलन महसूस हो रही थी।
"यह सपना नहीं है," आर्यन ने खुद से कहा, उसकी आवाज़ गुफा की दीवारों से टकराकर वापस आई। "यह मौत का मंजर था... मेरी मौत का।"
वह समझ गया था कि यह गुफा कोई साधारण खंडहर नहीं, बल्कि उसके पिछले जन्म की कब्र का दरवाजा है। और उस दरवाजे की चाबी अब उसके हाथ में थी।
रहस्य की पहली कड़ी
आर्यन गुफा से बाहर आया। बाहर चाँद आधा ढका हुआ था। तभी उसे अहसास हुआ कि कोई उसे देख रहा है।
पहाड़ी के ऊपर एक परछाईं खड़ी थी। एक औरत, जिसके सफ़ेद कपड़े हवा में लहरा रहे थे।
आर्यन ने उसे पुकारना चाहा, लेकिन आवाज़ गले में ही फंस गई। वह आकृति एक पल के लिए रुकी, और फिर अंधेरे में ओझल हो गई।
आर्यन को अपनी रगों में दौड़ते खून का शोर सुनाई दे रहा था।
उसे नहीं पता था कि वह कौन थी, लेकिन एक बात साफ थी।
इस सिक्के के जागते ही, वे लोग भी जाग गए थे जो सदियों से इस राज को दफन रखना चाहते थे।