मेरे साजन की सहेली
वह जो बिन बुलाए आई
📤 🌓
अध्याय 1

वह जो बिन बुलाए आई

मुंबई की उस सर्द रात में विक्रम सिंह राय की हवेली रोशनी से जगमगा रही थी। आज विक्रम और अनन्या की शादी की तीसरी सालगिरह की पार्टी थी। शहर के हर बड़े नाम ने वहां शिरकत की थी। अनन्या एक गहरे लाल रंग के गाउन में किसी रानी से कम नहीं लग रही थी। और विक्रम अपनी ब्लैक टक्सीडो में हमेशा की तरह आकर्षक। सब कुछ एकदम परफेक्ट था। लोग ड्रिंक्स ले रहे थे, धीमी धुन पर जैज़ म्यूजिक बज रहा था। और विक्रम अनन्या का हाथ थामे मेहमानों से मिल रहा था। तभी हॉल के मुख्य दरवाजे पर एक अजीब सी खामोशी छा गई। अनन्या ने पलकें उठाकर देखा। दरवाजे पर एक औरत खड़ी थी। उसने काले रंग की एक बेहद शानदार सिल्क की ड्रेस पहनी थी। उसके घुंघराले बाल खुले थे और होठों पर एक ऐसी मुस्कान थी जिसमें आत्मविश्वास कम और एक तरह की चुनौती ज्यादा झलक रही थी। "वो कौन है?" अनन्या ने धीमी आवाज़ में विक्रम से पूछा। पर विक्रम ने कोई जवाब नहीं दिया। अनन्या ने मुड़कर विक्रम का चेहरा देखा। विक्रम के चेहरे से जैसे खून ही निचोड़ लिया गया हो। उसकी उंगलियों की पकड़ अनन्या के हाथ पर इतनी सख्त हो गई कि अनन्या को हल्का सा दर्द महसूस हुआ। "विक्रम? क्या हुआ?" इससे पहले कि विक्रम कुछ कह पाता, वह काले लिबास वाली औरत सीधे उनकी तरफ चलते हुए आ गई। उसने किसी और मेहमान की तरफ देखा तक नहीं। "हैप्पी एनिवर्सरी, विक्की!" उस औरत की आवाज़ में एक अजीब सी खनक थी। 'विक्की?' अनन्या ने मन ही मन सोचा। दुनिया विक्रम सिंह राय को सिर्फ मिस्टर राय या विक्रम कहकर बुलाती थी। यह विक्की कौन था? विक्रम ने अपना गला साफ किया, उसकी आवाज़ में एक अनजानी सी घबराहट थी जिसे सिर्फ अनन्या ही महसूस कर सकती थी। "ज़ोया... तुम... तुम तो लंदन में थी। "थी। पर अब हमेशा के लिए वापस आ गई हूँ। क्या तुम अपनी इतनी खूबसूरत पत्नी से मेरा परिचय नहीं करवाओगे?" ज़ोया ने अपनी गहरी भूरी आँखों से अनन्या को घूरते हुए कहा। विक्रम ने गहरी सांस ली। "अनन्या, यह ज़ोया है। मेरी... मेरी कॉलेज की दोस्त। और ज़ोया, यह मेरी पत्नी, अनन्या है।" ज़ोया ने अपना हाथ आगे बढ़ाया। "तुमसे मिलकर बहुत खुशी हुई, अनन्या। विक्की ने कभी बताया नहीं कि वह इतनी खूबसूरत लड़की से शादी करेगा। खैर, वो अक्सर मुझे बताए बिना बहुत कुछ कर जाता था।" ज़ोया की आखिरी लाइन में एक अजीब सा तंज था जो हवा में जहर की तरह घुल गया। "थैंक यू, ज़ोया। विक्रम ने भी मुझे तुम्हारे बारे में... कभी कुछ नहीं बताया," अनन्या ने उतनी ही मजबूती से हाथ मिलाते हुए जवाब दिया। ज़ोया मुस्कुराई, पर वह मुस्कान उसकी आँखों तक नहीं पहुंची। "कोई बात नहीं। अब मैं आ गई हूँ। हमारे पास एक-दूसरे को जानने के लिए बहुत वक्त है।" ज़ोया वहां से मुड़कर बार की तरफ चली गई, लेकिन अनन्या की नजरें विक्रम पर टिक गईं। विक्रम के माथे पर पसीने की कुछ बूंदें चमक रही थीं। एक पत्नी की छठी इंद्री चीख-चीख कर कह रही थी कि वह औरत सिर्फ एक 'दोस्त' नहीं थी। वह एक तूफान थी, जो उनकी जिंदगी की चौखट पर खड़ा था। और यह तो बस शुरुआत थी।

💬 बातचीत (Comments)
📖 सूची समाप्त 🎉