प्रतिशोध की बिसात और पत्थर का दिल
आर्यन का नया अवतार
6 महीने बीत चुके थे। दिल्ली की बिजनेस मैगजीन्स के कवर पर अब सिर्फ एक ही नाम था— आर्यन खन्ना।
अपने पिता के साम्राज्य को संभालने के बाद, आर्यन ने उसे चार गुना बड़ा कर दिया था।
अब उसके पास प्राइवेट जेट था, अंगरक्षक थे और एक ऐसी खामोशी, जिससे बड़े-बड़े बिजनेसमैन कांपते थे।
उसने अपनी आँखों से वो 'शिमला वाला सुकून' पूरी तरह मिटा दिया था। अब उसकी आँखों में सिर्फ गणित था—फायदे और नुकसान का।
रोहन की बर्बादी का आगाज़
रोहन की कंपनी, जो कभी माहिरा के नाम पर उछल रही थी, अब कर्ज में डूब रही थी। उसे पता भी नहीं था कि उसकी हर बड़ी डील को पीछे से कोई काट रहा है।
एक सुबह रोहन के ऑफिस में नोटिस पहुँचता है कि उसकी कंपनी का 51% हिस्सा एक अनजान फर्म ने खरीद लिया है।
बदहवास होकर रोहन उस नए 'मालिक' से मिलने पहुँचता है। जैसे ही ऑफिस का बड़ा दरवाजा खुलता है।
सामने ऊँची कुर्सी पर आर्यन बैठा होता है, हाथ में वही पीला पुराना ब्रश जिसे वो आज भी अपने पास रखता था।
आर्यन (ठंडी मुस्कान के साथ): "बैठो रोहन। सुना है तुम्हारी कंपनी की दीवारें गिर रही हैं? मैंने सोचा थोड़ा 'रिनोवेशन' कर दूँ।"
रोहन के पसीने छूट गए। "आर्यन... तुम? ये सब तुमने किया?"
आर्यन: "मैंने तो सिर्फ शुरुआत की है। अब मुझे वो चाहिए जिसके लिए तुमने ये जाल बुना था। मुझे माहिरा चाहिए।"
जिंदा लाश: माहिरा का हाल
रोहन के घर के एक अंधेरे कमरे में माहिरा बैठी थी। उसके सामने कैनवास था, लेकिन उस पर सिर्फ काले रंग के धब्बे थे। उसने 6 महीनों से ठीक से बात नहीं की थी।
रोहन उसे डराता था कि अगर उसने भागने की कोशिश की, तो वो आर्यन को जान से मार देगा।
तभी कमरे का दरवाजा खुला। माहिरा को लगा रोहन होगा, पर वहां आर्यन खड़ा था।
माहिरा ने अपनी धुंधली आँखों से उसे देखा।
आर्यन अब वो पुराने स्वेटर वाला लड़का नहीं था। उसने तीन-पीस सूट पहना था और उसका चेहरा सख्त था।
माहिरा (कांपती आवाज में): "आर्यन... तुम यहाँ कैसे? भाग जाओ यहाँ से, रोहन तुम्हें नुकसान पहुँचाएगा।"
आर्यन (पास आकर, माहिरा की ठुड्डी ऊपर उठाते हुए): "अब कोई मुझे नुकसान नहीं पहुँचा सकता, माहिरा।
अब मैं खुद एक तूफान हूँ। तुमने जो कुर्बानी दी थी, उसका हिसाब चुकता करने आया हूँ।"
नफरत या प्यार?
आर्यन को उम्मीद थी कि माहिरा उसे देखकर खुश होगी, लेकिन माहिरा की आँखों में सिर्फ खौफ और शर्मिंदगी थी।
उसे लग रहा था कि उसने आर्यन को पूरी तरह बदल दिया है, उसे एक पत्थर बना दिया है।
आर्यन: "चलो मेरे साथ। मैंने तुम्हें रोहन से खरीद लिया है।"
माहिरा (हैरानी से): "खरीद लिया? क्या मैं तुम्हारे लिए कोई प्रॉपर्टी हूँ?"
आर्यन: "इस दुनिया में हर चीज की एक कीमत होती है, माहिरा। तुमने मुझे बचाने की कीमत चुकाई थी, अब मैं तुम्हें बचाने की कीमत चुका रहा हूँ।"
आर्यन उसे जबरदस्ती अपने साथ ले आया। लेकिन उसे अपने पुराने घर नहीं, बल्कि एक आलीशान पेंटहाउस में रखा, जो किसी जेल से कम नहीं था।
आर्यन अब उससे प्यार नहीं जताता था, बल्कि वो उसे अपनी जीत का एक 'इनाम' समझ रहा था।
गहरा राज
उसी रात, आर्यन को अपने पिता की दराज में एक पुरानी फाइल मिली। उस फाइल में 'विंटेज पैलेस' (शिमला वाली हवेली) के असली कागजात थे।
आर्यन के हाथ कांपने लगे जब उसने देखा कि वो हवेली असल में माहिरा की मां के नाम पर थी, जिसे आर्यन के पिता ने सालों पहले धोखे से हड़प लिया था।
इसका मतलब था कि आर्यन और माहिरा की दुश्मनी आज की नहीं, बल्कि पीढ़ियों पुरानी थी। और माहिरा को यह बात पहले से पता थी!
आर्यन (गुस्से में चिल्लाते हुए): "माहिरा! तुमने मुझसे ये सच क्यों छुपाया?"
तभी कमरे में अवनि दाखिल होती है, जिसके चेहरे पर एक शातिर मुस्कान है।
"क्योंकि वो तुम्हें बर्बाद करना चाहती थी आर्यन, प्यार तो सिर्फ एक नाटक था।"