लिफ्ट की वो मुलाकात
मुंबई की सुबह की भागदौड़ और 'रायचौधरी कॉर्पोरेशन' की गगनचुंबी इमारत। कांच की बनी यह बिल्डिंग शहर के रईसों की शान थी।
जिसके 50वें फ्लोर पर बैठकर रहस्यमयी बिलेनियर कबीर रायचौधरी पूरी दुनिया की इकोनॉमी हिला देता था। लेकिन एक अजीब बात थी—किसी ने भी कबीर का चेहरा नहीं देखा था।
लोग कहते थे कि वह इतना बदसूरत है कि छुपकर रहता है, तो कुछ कहते थे कि वह इतना बेरहम है कि उसकी आँखों में झांकना मौत को दावत देना है।
नीचे रिसेप्शन पर ज़ोया खान खड़ी थी। साधारण कुर्ती, जींस और आंखों में ढेर सारे सपने लिए वह अपने पोर्टफोलियो को कसकर पकड़े हुए थी। आज उसका आर्किटेक्ट पद के लिए इंटरव्यू था।
"प्लीज, मुझे देर हो रही है!" ज़ोया ने घड़ी देखते हुए कहा और तेजी से बंद होती लिफ्ट की ओर दौड़ी।
उसने लिफ्ट के दरवाजे के बीच अपना हाथ डाल दिया। दरवाजा रुक गया और वह अंदर घुस गई। अंदर एक लड़का खड़ा था।
उसने एक साधारण सी नीली शर्ट पहनी थी, चश्मा लगा रखा था और उसके हाथ में कॉफी के दो कप थे। वह शांत दिख रहा था, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी गहराई थी।
"थैंक यू!" ज़ोया ने हाफते हुए कहा। "यह रायचौधरी साहब भी न, सुबह 9 बजे का इंटरव्यू रखते हैं। पता नहीं खुद सोते हैं या नहीं!"
वह लड़का (जो असल में खुद कबीर था, अपने 'असिस्टेंट' वाले भेष में) हल्का सा मुस्कुराया। "शायद उन्हें अनुशासन पसंद है।"
"अनुशासन? सुना है वो कोई खड़ूस बुड्ढा है जो अंधेरे कमरे में बैठकर सबको डराता रहता है," ज़ोया ने बड़बड़ाते हुए अपने बाल ठीक किए।
"अरे, मेरा नाम ज़ोया है। तुम यहाँ क्या करते हो? प्यून हो या ड्राइवर?"
कबीर को अपनी हंसी रोकना मुश्किल हो रहा था। बरसों बाद किसी ने उससे इतनी बेबाकी से बात की थी। "मैं... मैं यहाँ छोटा-मोटा असिस्टेंट हूँ। नाम कबीर है।"
"अच्छा कबीर, सुनो! अगर आज मुझे नौकरी मिल गई, तो मैं तुम्हें पार्टी दूंगी। बस दुआ करना कि वो 'राक्षस' बॉस मेरा डिजाइन रिजेक्ट न करे," ज़ोया ने मासूमियत से कहा।
तभी लिफ्ट 45वें फ्लोर पर रुकी। ज़ोया बाहर निकलने लगी, लेकिन उसका दुपट्टा कबीर की घड़ी में फंस गया।
एक पल के लिए दोनों बहुत करीब आ गए। कबीर ने उसकी आंखों में देखा—वहां डर नहीं, एक चमक थी।
"दुपट्टा छोड़ो, मुझे देर हो रही है!" ज़ोया ने हड़बड़ी में कहा। कबीर ने धीरे से दुपट्टा सुलझाया। ज़ोया भागते हुए बाहर निकल गई।
कबीर लिफ्ट में अकेला रह गया।
उसने अपनी घड़ी देखी और फिर उस कॉफी की तरफ, जो अब ठंडी हो रही थी। उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो सालों से गायब थी।
उसने अपने कान में लगे वायरलेस हेडसेट को ऑन किया और अपनी भारी, रोबीली आवाज़ में कहा— "सेक्रेटरी, आज के इंटरव्यू पैनल में मेरा नाम भी जोड़ दो।
मुझे उस लड़की का डिजाइन खुद देखना है जिसने मुझे 'राक्षस' कहा है।"