पवित्र रिश्ता❤️
आमना-सामना
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अध्याय 2

आमना-सामना

स्थान : सिंघानिया ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज (कॉर्पोरेट ऑफिस)। समय : सुबह 10:00 बजे। सिंघानिया ग्रुप का दफ्तर किसी शीशे के महल जैसा था। हर तरफ सूट-बूट पहने लोग फाइलों के साथ दौड़ रहे थे। आर्यन अपनी पुरानी फाइल सीने से चिपकाए रिसेप्शन पर खड़ा था। उसने आज अपना सबसे साफ सफेद शर्ट पहना था, जिसे उसकी मां ने बड़े प्यार से इस्तरी (Press) किया था। "जी, मेरा नाम आर्यन है। अकाउंटेंट की पोस्ट के लिए इंटरव्यू है," आर्यन ने विनम्रता से कहा। रिसेप्शनिस्ट ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा—उसकी साधारण चप्पलें और सादगी यहाँ के माहौल में मेल नहीं खा रही थीं। उसने इशारा किया, "वेटिंग एरिया में बैठिए, आपका नंबर आने पर बुलाया जाएगा।" सिया का केबिन : पावर और एटीट्यूड अंदर केबिन में सिया अपने विशाल डेस्क पर बैठी थी। कल की वो घटना उसके दिमाग से निकल नहीं रही थी। उसे गुस्सा आ रहा था कि एक मामूली साइकिल चलाने वाले ने उसे 'अंधा' कह दिया। तभी उसका असिस्टेंट अंदर आया, "मैम, अकाउंट्स डिपार्टमेंट के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स बाहर हैं। पहले वाले को भेजूँ?" सिया ने बिना सिर उठाए कहा, "भेजो। और याद रहे, मुझे स्मार्ट लोग चाहिए, सिर्फ डिग्री वाले नहीं।" इंटरव्यू की घंटी: धड़कनों की रफ़्तार दो कैंडिडेट्स के बाद आर्यन का नाम पुकारा गया। जैसे ही उसने भारी शीशे का दरवाजा धकेला और अंदर कदम रखा, उसकी नजर सामने बैठी लड़की पर पड़ी। सिया फाइल पढ़ रही थी। जैसे ही उसने सिर उठाया, दोनों की आंखें मिलीं और कमरे का तापमान जैसे अचानक गिर गया। सिया (हैरानी और गुस्से के साथ): "तुम? यहाँ?" आर्यन (हल्का सा चौंककर लेकिन शांत): "नमस्ते। मुझे नहीं पता था कि 'सिंघानिया ग्रुप' की मालकिन कल वाली कार सवार ही हैं।" सिया अपनी कुर्सी से खड़ी हो गई। उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आई। "कल तो बहुत बड़े-बड़े भाषण दे रहे थे, चश्मा उतारने की सलाह दे रहे थे। और आज? आज उसी 'अंधी' लड़की के सामने नौकरी की भीख मांगने आए हो?" आर्यन की पकड़ अपनी फाइल पर मजबूत हो गई, लेकिन उसने अपना आपा नहीं खोया। "मैम, मैं यहाँ भीख मांगने नहीं, अपनी काबिलियत के दम पर नौकरी पाने आया हूँ। कल जो हुआ वो एक हादसा था, और जो मैंने कहा वो सच था। सच कड़वा जरूर होता है, पर वो भीख नहीं होता।" सिया को उसकी ये बेबाकी और चुभ गई। उसने आर्यन की फाइल झपट्टे से ली और पन्ने पलटने लगी। उसकी नजर आर्यन की मार्कशीट पर पड़ी— गोल्ड मेडलिस्ट, 98% मार्क्स। वह दंग रह गई। इतनी शानदार प्रोफाइल? लेकिन उसका इगो (अहंकार) उसे झुकने नहीं दे रहा था। सिया का खेल: एक मुश्किल शर्त सिया ने फाइल टेबल पर पटकी। "प्रोफाइल तो अच्छी है। लेकिन मुझे शक है कि तुम इस हाई-फाई ऑफिस में टिक पाओगे। यहाँ चप्पल पहनकर काम नहीं होता।" आर्यन: "काम दिमाग और ईमानदारी से होता है मैम, जूतों से नहीं।" सिया की आंखों में शरारत चमकी। उसने एक भारी फाइल आर्यन की तरफ बढ़ाई। "ठीक है। ये पिछले तीन साल का ऑडिट डेटा है। हमारे अकाउंटेंट्स इसमें एक 50 लाख की गड़बड़ी नहीं पकड़ पा रहे हैं। अगर तुम ये शाम 5 बजे तक सॉल्व कर देते हो, तो नौकरी तुम्हारी। वरना, फिर कभी इस बिल्डिंग की सीढ़ियां मत चढ़ना।" आर्यन ने घड़ी देखी। अभी सुबह के 11 बज रहे थे। यह काम कम से कम दो दिन का था। "मंजूर है," आर्यन ने बिना डरे फाइल उठाई। दोपहर का संघर्ष आर्यन को एक छोटे से कोने वाले डेस्क पर बिठा दिया गया। ऑफिस के बाकी लोग उसे देख कर हंस रहे थे। सिया बार-बार अपने केबिन के कांच से उसे देख रही थी। उसे लगा था कि वह एक-दो घंटे में हार मान लेगा, लेकिन आर्यन पत्थर की मूर्ति की तरह जमा हुआ था। उसने पानी तक नहीं पिया। उसकी उंगलियां कैलकुलेटर और कीबोर्ड पर बिजली की तरह चल रही थीं। शाम के 4:30 बजे। सिया अपनी कॉफी पीते हुए बाहर निकली। उसे यकीन था कि आर्यन फेल हो गया होगा। "वक्त खत्म होने वाला है मिस्टर आर्यन। बैग पैक कर लिया?" सिया ने तंज कसा। आर्यन खड़ा हुआ। उसके चेहरे पर थकान थी, लेकिन आंखों में जीत की चमक। उसने एक सिंगल पेपर सिया की तरफ बढ़ाया। "मैम, गड़बड़ी 50 लाख की नहीं, बल्कि 52 लाख 40 हजार की है। और ये पैसा किसी गलती से नहीं, बल्कि आपके सीनियर मैनेजर ने जानबूझकर डाइवर्ट किया है। ये रहा उसका प्रूफ।" पूरा ऑफिस सन्न रह गया। सिया ने पेपर देखा। उसकी गणना एकदम सटीक थी। उसने जिस मैनेजर पर भरोसा किया था, उसी ने उसे धोखा दिया था। सिया की नजर आर्यन पर टिक गई। पहली बार उसे लगा कि इस लड़के के फटे हुए स्वाभिमान के पीछे एक बहुत बड़ा व्यक्तित्व छिपा है। सिया ने कुछ देर खामोश रहने के बाद कहा, "कल सुबह 9 बजे जॉइनिंग है। और हाँ... कल से जूते पहनकर आना।" आर्यन ने सिर झुकाकर 'थैंक यू' कहा और बाहर निकल गया। सिया उसे जाते हुए देखती रही। तभी उसके केबिन में एक कॉल आया। "हेलो सिया डार्लिंग! मैं वापस आ गया हूँ।" फोन पर विक्रम की आवाज थी—सिया का मंगेतर, जो विदेश से लौटा था। सिया के चेहरे की चमक उड़ गई। उसे नहीं पता था कि अब उसकी जिंदगी में एक तरफ 'ईमानदार' आर्यन है और दूसरी तरफ 'शातिर' विक्रम।

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