दिल्ली की दीवारें और टूटा हुआ भरोसा
आलीशान बंगला और घुटन
आर्यन जैसे ही अपने दिल्ली वाले बंगले में दाखिल हुआ, वहां जश्न का माहौल था। फूलों की सजावट और मेहमानों की गहमागहमी।
उसके पिता, विक्रम खन्ना, मेहमानों के बीच खड़े होकर घोषणा कर रहे थे— "आर्यन आ गया है! अब हमारे बिजनेस और इस घर की नई शुरुआत होगी।
अवनि और आर्यन की सगाई बस दो दिन बाद है।"अवनि, आर्यन के पिता के बिजनेस पार्टनर की बेटी थी। पढ़ी-लिखी, सुंदर और बेहद महत्वाकांक्षी।
लेकिन आर्यन की आँखों के सामने तो सिर्फ माहिरा का वो मासूम चेहरा घूम रहा था।
आर्यन (गुस्से में अपने पिता से): "डैड! आपने मुझसे पूछा तक नहीं। मैं शिमला में एक प्रोजेक्ट पर हूँ, मेरी एक जिम्मेदारी है वहां।"
विक्रम खन्ना (सख्ती से): "वो हवेली पत्थर है आर्यन, और ये तुम्हारी जिंदगी। मैंने फैसला कर लिया है। अवनि तुम्हारे लिए परफेक्ट है।"
माहिरा की बेबसी
वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली के ही एक छोटे से होटल में माहिरा रुकी हुई थी। वो रोहन के साथ दिल्ली सिर्फ इसलिए आई थी।
ताकि वो उसके पिता से मिल सके और हमेशा के लिए ये रिश्ता खत्म कर सके। उसे नहीं पता था कि रोहन ने उसे धोखे से बुलाया है।रोहन ने माहिरा का फोन छीन लिया था और उसे कमरे में बंद कर दिया था।
रोहन (चिल्लाते हुए): "तुम उस मामूली आर्किटेक्ट के पास वापस नहीं जाओगी, माहिरा! तुम मेरी हो और तुम्हें मुझसे कोई नहीं छीन सकता।"
माहिरा खिड़की के पास खड़ी आंसू बहा रही थी। उसके हाथ में अभी भी वो पीला धागा था, जो आर्यन के मफलर से उलझा था।
उसने मन ही मन कहा— "आर्यन, मैंने तुमसे वादा किया था कि इंतज़ार करना... क्या तुम मेरा यकीन करोगे?"
इत्तेफाक या किस्मत?
सगाई की शॉपिंग के लिए अवनि जबरदस्ती आर्यन को दिल्ली के सबसे महंगे मॉल में ले गई। आर्यन बेमन से वहां घूम रहा था।
तभी उसकी नजर दूर एक कैफे में बैठे रोहन पर पड़ी। रोहन वहां अपनी एक दोस्त से हंस-हंस कर बातें कर रहा था।
आर्यन का खून खौल उठा। उसने देखा कि रोहन के पास माहिरा का फोन था। आर्यन को समझ आ गया कि माहिरा अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि किसी मजबूरी में दिल्ली आई है।
आर्यन ने अवनि को वहीं छोड़ा और रोहन का पीछा करना शुरू किया। वो देखना चाहता था कि माहिरा कहाँ है।
आधी रात का रेस्क्यू
रोहन जिस होटल में ठहरा था, आर्यन वहां पहुँच गया। वेटर को रिश्वत देकर उसने माहिरा का कमरा नंबर पता किया।
रात के 12 बज रहे थे। माहिरा फर्श पर बैठी सो गई थी, उसकी आँखों पर आंसुओं के निशान थे।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
माहिरा डर गई।आर्यन (धीमी आवाज में): "माहिरा... दरवाजा खोलो। मैं हूँ।"
माहिरा की रूह में जान लौट आई। उसने दरवाजा खोला और सीधे आर्यन के गले लग गई।
आर्यन ने उसे कसकर थाम लिया, जैसे अगर वो उसे छोड़ेगा तो वो फिर गायब हो जाएगी।
माहिरा (सिसकते हुए): "आर्यन, मुझे लगा तुम कभी नहीं आओगे। रोहन ने मुझे कैद कर लिया था।"
आर्यन: "शू... शांत हो जाओ। मैंने कहा था ना, ये धागे बहुत मजबूत हैं। चलो यहाँ से।"
एक नई मुश्किल
आर्यन माहिरा को लेकर अपने घर पहुँचा। उसे लगा कि वो अपने पिता को समझा देगा। लेकिन जैसे ही उसने माहिरा के साथ घर में कदम रखा, सामने पूरा परिवार और अवनि खड़े थे।
विक्रम खन्ना (दहाड़ते हुए): "ये क्या बदतमीजी है आर्यन? अपनी सगाई से दो दिन पहले तुम इस मामूली लड़की को घर लेकर आए हो? कौन है ये?"
आर्यन ने माहिरा का हाथ मजबूती से पकड़ा और सबके सामने कहा— "ये वो है, जिसके बिना मैं अधूरा हूँ। ये सगाई नहीं होगी, डैड।"
अवनि के हाथ से शैंपेन का गिलास छूटकर गिर गया। माहिरा के चेहरे पर डर था, और आर्यन के पिता की आँखों में नफरत।
तभी अवनि आगे बढ़ी और माहिरा के चेहरे पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। "तुम जैसे लोग पैसों के लिए किसी भी घर में घुस जाते हैं!"
आर्यन की मुट्ठी भिंच गई। अब जंग सिर्फ प्यार की नहीं, सम्मान की भी थी।
तमाचे की गूँज ने उस आलीशान हॉल में सन्नाटा फैला दिया। माहिरा का चेहरा एक तरफ झुक गया, उसकी आँखों से आँसू का एक कतरा फर्श पर गिरा।
आर्यन की आँखों में जो खून उतरा, उसने अवनि और उसके पिता को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।