ऑफिस का पहला दिन और पुरानी दुश्मनी
अगली सुबह, ज़ोया 'रायचौधरी कॉर्पोरेशन' के गेट पर खड़ी थी। उसने आज एक सलीकेदार सफेद कुर्ता और नीला दुपट्टा पहना था।
उसके दिमाग में बार-बार कबीर की वो चेतावनी गूँज रही थी— "मेरा राज़ मत खोलना!"
जैसे ही वह अंदर पहुँची, उसने देखा कि कबीर (उसी पुराने साधारण अवतार में) रिसेप्शन के पास खड़ा किसी से बात कर रहा था। वहां मौजूद कुछ वरिष्ठ कर्मचारी उसे झिड़क रहे थे।
"ए कबीर! ये फाइलें ले जाकर डेस्क पर रखो, इतना समय क्यों लग रहा है?" एक मैनेजर चिल्लाया।
ज़ोया का खून खौल उठा।
वह जानती थी कि यह शख्स शहर का सबसे शक्तिशाली बिलेनियर है, लेकिन वह चुपचाप अपमान सह रहा था।
ज़ोया आगे बढ़ने ही वाली थी कि कबीर ने उसे आँखों के इशारे से रोक दिया। उसकी नज़रों में एक अजीब सा संयम था।
"ज़ोया जी, आपका डेस्क वहां कोने में है," कबीर ने पास आकर बहुत ही साधारण आवाज़ में कहा, जैसे वह उसे पहली बार मिल रहा हो।
ज़ोया अपनी डेस्क पर बैठ गई, लेकिन उसका मन काम में नहीं लग रहा था। दोपहर में उसे कबीर का मैसेज आया: "कॉन्फ्रेंस रूम में आओ, एक नया प्रोजेक्ट डिस्कस करना है।"
कॉन्फ्रेंस रूम में कंपनी के बड़े-बड़े हेड्स बैठे थे। कबीर वहां फाइलों का ढेर लेकर खड़ा था, जैसे वह वाकई एक छोटा कर्मचारी हो।
मीटिंग की कमान संभाल रहा था आर्यन, जो कबीर का चचेरा भाई था और कबीर की गैरमौजूदगी में खुद को सर्वेसर्वा समझता था।
"हमें धारावी के पास की उस पुरानी ज़मीन पर एक आलीशान मॉल बनाना है," आर्यन ने कड़क आवाज़ में कहा। "ज़ोया, सुना है तुम्हारी ड्राइंग अच्छी है, तो तुम इसका लेआउट तैयार करो।"
ज़ोया ने खड़े होकर विरोध किया, "सर, वहां गरीब बच्चों का एक पुराना स्कूल है। अगर हम मॉल बनाएंगे, तो वो स्कूल ढहा दिया जाएगा। क्यों न हम उसे रिनोवेट करें?"
पूरे रूम में सन्नाटा छा गया। आर्यन ज़ोर से हँसा। "यह बिजनेस है ज़ोया, चैरिटी नहीं। कबीर रायचौधरी को सिर्फ मुनाफे से मतलब है।"
ज़ोया ने पीछे खड़े कबीर की तरफ देखा। कबीर की मुट्ठियाँ भिंची हुई थीं, लेकिन वह कुछ नहीं बोल सका।
ज़ोया को उस पर गुस्सा आया— 'इतना बड़ा बिलेनियर होकर भी यह अपने भाई को क्यों नहीं रोकता?'
शाम को जब सब चले गए, ज़ोया ने कबीर को केबिन के पास पकड़ा।
"आप चुप क्यों थे? आप तो बॉस हैं न? क्यों उस स्कूल को टूटने दे रहे हैं?"
कबीर ने अपना चश्मा उतारा और खिड़की के बाहर देखते हुए बोला, "आर्यन को लगता है कि बिज़नेस सिर्फ दिमाग से होता है।
मैं उसे उसकी गलती का एहसास दिलाना चाहता हूँ, पर सही समय पर। अभी मैं सिर्फ एक 'असिस्टेंट' हूँ, याद है न?"
"आपकी इस पहचान के चक्कर में किसी का घर उजड़ जाएगा!" ज़ोया गुस्से में बोलकर बाहर निकल गई।
रात को ज़ोया को एक गुमनाम ईमेल मिला।
उसमें उस ज़मीन के असली कागज़ात थे, जो साबित करते थे कि आर्यन वहां मॉल नहीं, बल्कि कुछ गैर-कानूनी काम करना चाहता था।
ईमेल भेजने वाले का नाम नहीं था, लेकिन ज़ोया को यकीन था कि यह कबीर ही है।
अगले दिन सुबह, जैसे ही ज़ोया ऑफिस पहुँची, उसने देखा कि कुछ गुंडे ऑफिस के बाहर हंगामा कर रहे थे। उनका निशाना ज़ोया थी क्योंकि उसने कल स्कूल का पक्ष लिया था।
गुंडों का लीडर ज़ोया का हाथ पकड़ने ही वाला था कि तभी एक हाथ बिजली की गति से आया और गुंडे की कलाई मरोड़ दी।
वह कबीर था। उसकी आँखों में इस समय वो 'असिस्टेंट' वाली नरमी नहीं थी। वहां वही 'राक्षस' था जिससे पूरी दुनिया डरती थी।
"मेरा हाथ छोड़... तू जानता नहीं मैं कौन हूँ!" गुंडा चिल्लाया।
कबीर ने उसके कान के पास झुककर बहुत धीरे से कहा, "तुम नहीं जानते कि मैं कौन हूँ।
अगर इस लड़की को दोबारा छुआ, तो तुम्हारी पूरी पुश्तें शहर से गायब हो जाएंगी।"